चमचासन

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सबसे  पहले सीधे  खड़े  हो जाइये.

मुंह  पर भोलापन  और आँखों  में

मक्कारी  लाइए ,

फिर क्रमशः  भोलेपन  को दीनता  में

 बदलिए 

और मक्कारी को चाटुकारिता  में

परिवर्तित  कीजिये  और टांगों  को सीधा

  रखिये .

धीरे  धीरे झुकाते  हुए  नासिका  को

जमीन 

पर ऊपर  से रखते  हुए जूते  पर रगदिये 

और गहरी  गहरी स्वास  लीजिये .

कुहनियों  को पेट  से सटाकर 

दोनों हाथ  जोड़कर  प्रणाम  कि मुद्रा  बनाइये 

जब तक जूते हटा  न लिए जाएँ  तब  

 तक सीधे खड़े मत होइए .

प्रारंभ  में इस असं  में कठिनाई  होती है

और स्वाभिमान  आदे  आता है,

किन्तु  1 सप्ताह  के निरंतर  अभ्यास  से

स्वाभिमान  का सर्वनाश  हो जायेगा 

और साधक  एक योग्य  चमचा  बनाकर 

 अधिकाधिक  लाभ  उठाएगा .

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